रसोई से कारोबार तक: रमा गुप्ता ने मसालों की खुशबू से लिखी महिला उद्यमिता की नई कहानी

कोविड में बंद हुआ Play School, मगर नहीं टूटा हौसला, रसोई से शुरू हुई नई कारोबारी यात्रा आज NAVRAS MASALE के रूप में नई पहचान बना रही है!
पॉजिटिव डेस्क/पलक:  रमा गुप्ता की कहानी उन महिलाओं की कहानी है, जो परिस्थितियों के बदलने का इंतजार नहीं करतीं, बल्कि बदलती परिस्थितियों में नई संभावनाएं तलाशती हैं। शिक्षा, अध्यापन, व्यवसाय और सामाजिक गतिविधियों से गुजरते हुए रमा ने वर्ष 2013 में अपना Play School एवं Day Care Centre शुरू किया। कोविड महामारी के दौरान जब यह व्यवसाय प्रभावित हुआ, तब उन्होंने अपनी रसोई में मौजूद एक हुनर को नई संभावना के रूप में पहचाना! घर पर तैयार किए गए मसालों के स्वाद से प्रेरित होकर उन्होंने मसाला निर्माण को व्यवसाय के रूप में अपनाने का निर्णय लिया। इसके लिए खादी ग्रामोद्योग से मसाला मेकिंग प्रशिक्षण लिया और PMFME योजना के अंतर्गत ऋण प्राप्त कर छोटी मसाला यूनिट की शुरुआत की। इसके बाद 27 दिसंबर 2022 को HUM SAKHI SHG के साथ उनकी उद्यमिता यात्रा ने नया रूप लिया। SHG से जुड़ी महिलाओं को साथ लेकर मसाला यूनिट को आगे बढ़ाने का प्रयास शुरू हुआ। आज LAKSHA GUPTA ENTERPRISES के माध्यम से NAVRAS MASALE ब्रांड को विकसित किया जा रहा है। 
साधारण शुरुआत, बड़े सपनों का सफर
8 जून 1976 को जन्मीं रमा गुप्ता के पिता हलवाई और मां गृहिणी थीं। साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने वाली रमा ने शिक्षा को अपनी ताकत बनाया और लक्ष्मीबाई कॉलेज, नॉर्थ कैंपस से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने समय के साथ अपने कौशल का दायरा भी बढ़ाया। कंप्यूटर, English Shorthand & Typing, मेहंदी कला, सिलाई और Home Guard Course जैसे विभिन्न प्रशिक्षणों ने उनके व्यक्तित्व को बहुआयामी बनाया। उन्होंने निजी स्कूल में शिक्षिका के रूप में कार्य किया। विवाह के बाद परिवार की जिम्मेदारियों के साथ Home Tuition शुरू की और बाद में Jewellery Shop का व्यवसाय भी संचालित किया। लेकिन अपने पैरों पर खड़े होने और कुछ अपना करने की उनकी इच्छा लगातार बनी रही।
2013 में खड़ा किया अपना Play School
साल 2013 में रमा गुप्ता ने अपने उद्यमशील सफर में एक बड़ा कदम उठाया। उन्होंने LAKSHAY EK NAYI DISHA FOUNDATION (Regd. 1093) के माध्यम से Play School एवं Day Care Centre की शुरुआत की। बच्चों की शिक्षा और देखभाल से जुड़ा यह संस्थान उनके लिए केवल व्यवसाय नहीं था। बल्कि समाज और बच्चों के भविष्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रयास भी था। कई वर्षों तक उन्होंने इस काम को आगे बढ़ाया। फिर कोविड महामारी ने शिक्षा क्षेत्र सहित छोटे व्यवसायों के सामने अभूतपूर्व चुनौती खड़ी कर दी। स्कूल बंद हुए और रमा का व्यवसाय भी गंभीर रूप से प्रभावित हुआ। लेकिन जहां एक अध्याय खत्म हुआ, वहीं रमा गुप्ता ने अपनी  में एक नए अध्याय की शुरुआत कर दी। रमा ने संकट को विराम नहीं, नई शुरुआत का संकेत बनाया और इस नई शुरुआत की पहली खुशबू आई—उनकी अपनी रसोई से। 
जब रसोई बनी नई उद्यमिता की प्रयोगशाला
कोविड के दौरान जब अधिकांश समय घर पर बीतने लगा, तब रमा का काफी समय रसोई में गुजरने लगा। वह घर के लिए स्वयं मसाले तैयार करती थीं। उनके हाथ से तैयार मसालों से बने भोजन के स्वाद को परिवार और परिचितों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने लगी। धीरे-धीरे उनके मन में एक विचार ने जन्म लिया— “अगर मेरे हाथ से तैयार मसालों का स्वाद लोगों को पसंद आता है, तो क्यों न इस हुनर को व्यवसाय का रूप दिया जाए?” यही छोटा-सा विचार आगे चलकर एक नए उद्यम की नींव बना।
रमा ने अपने घरेलू अनुभव को केवल घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने इसे एक व्यवस्थित व्यवसाय में बदलने की दिशा में कदम उठाया।
महिला सशक्तिकरण की सकारात्मक तस्वीर
रमा गुप्ता की कहानी महिला सशक्तिकरण की उस जमीनी तस्वीर को सामने लाती है, जहां एक महिला अपने हुनर को पहचानकर उसे आर्थिक अवसर में बदलने का प्रयास करती है।
यह कहानी बताती है कि महिला सशक्तिकरण केवल बड़े मंचों या बड़े संस्थानों तक सीमित नहीं है। इसकी शुरुआत घर से भी हो सकती है—एक हुनर से, एक विचार से और अपने ऊपर भरोसे से!
जब वही महिला दूसरी महिलाओं को भी अपने साथ जोड़ती है, तो व्यक्तिगत प्रयास सामूहिक संभावना में बदल जाता है।
रमा गुप्ता की यात्रा का संदेश
रमा गुप्ता की कहानी किसी एक दिन में मिली सफलता की कहानी नहीं है।
यह वर्षों के अनुभव, मेहनत, सीखने और बार-बार नई शुरुआत करने की कहानी है। उनकी यात्रा यह संदेश देती है— “हुनर को अवसर मिले तो वही हुनर आत्मनिर्भरता का आधार बन सकता है।”
रसोई से निकला एक विचार, अब बन रहा है पहचान कभी रमा गुप्ता की रसोई में मसाले सिर्फ परिवार के भोजन का हिस्सा थे। आज वही हुनर NAVRAS MASALE के रूप में एक नए व्यवसाय की पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।




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