World Food Day 2026 Special Story संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक, सुनीता जी और ‘कुटुंब जी’ की कहानी

घर के पारंपरिक स्वाद से व्यवसाय की पहचान तक: कुटुंब जी की प्रेरणादायक यात्रा
पॉजिटिव डेस्क/पलक: भारतीय रसोई में अचार सिर्फ एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि स्वाद, परंपरा और पीढ़ियों से चली आ रही पाक-कला का हिस्सा है। घरों में तैयार होने वाले पारंपरिक अचार परिवारों की खानपान संस्कृति से जुड़े होते हैं। जब इसी हुनर को व्यवसाय का रूप देने का प्रयास किया जाता है, तो उसके साथ एक नई जिम्मेदारी भी जुड़ जाती है, गुणवत्ता बनाए रखना, ग्राहकों तक पहुँचना और बाजार में अपनी पहचान बनाना।
विश्व खाद्य दिवस 2026 के अवसर पर मोबाइल पत्रिका प्रस्तुत कर रही है सुनीता जी और उनके अचार ब्रांड ‘कुटुंब जी’ (Kutumb Ji) की विशेष कहानी। यह बातचीत पारंपरिक भारतीय स्वादों को नई पहचान देने के प्रयास, खाद्य व्यवसाय की चुनौतियों और उन महिलाओं के लिए प्रेरक संदेश पर केंद्रित है, जो अपने हुनर को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना चाहती हैं।
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने विश्व खाद्य दिवस 2026 की थीम “Innovate Today. Nourish Tomorrow.” रखी है। इसका संदेश है कि पारंपरिक ज्ञान, नवाचार और समावेशी प्रयासों के माध्यम से भविष्य की खाद्य व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है।
मोबाइल पत्रिका | विशेष साक्षात्कार | महिला उद्यमिता | पारंपरिक भारतीय खाद्य संस्कृति

परंपरा, स्वाद और एक नया सपना
पलक: सुनीता जी, विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर हम आपसे कुटुंब जी की यात्रा के बारे में जानना चाहते हैं। सबसे पहले बताइए कि कुटुंब जी क्या है और इसकी शुरुआत करने का विचार कैसे आया?
सुनीता जी: नमस्कार! मोबाइल पत्रिका का बहुत-बहुत धन्यवाद। कुटुंब जी मेरे लिए केवल अचार का ब्रांड नहीं, बल्कि अपने हुनर को एक पहचान देने की कोशिश है। भारतीय घरों में अचार बनाने की परंपरा बहुत पुरानी है। इसी पारंपरिक स्वाद को अधिक लोगों तक पहुँचाने और इसे व्यवस्थित व्यवसाय का रूप देने की सोच के साथ कुटुंब जी की शुरुआत की।
पलक: कुटुंब जी के पीछे आपका सबसे बड़ा सपना क्या है?
सुनीता जी: मेरा उद्देश्य पारंपरिक भारतीय (आचार के) स्वादों को लोगों तक पहुँचाना और कुटुंब जी को एक भरोसेमंद पहचान दिलाना है। मैं चाहती हूँ कि हमारे उत्पाद अधिक ग्राहकों तक पहुँचें और मेरी यात्रा दूसरी महिलाओं को भी अपने हुनर से कुछ नया करने की प्रेरणा दे।

चुनौतियों से सीखने तक का सफर
पलक: किसी भी नए व्यवसाय की शुरुआत आसान नहीं होती। कुटुंब जी के सफर में आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
सुनीता जी: किसी भी नए व्यवसाय में बाजार को समझना, ग्राहकों तक पहुँचना, उत्पाद की पहचान बनाना और व्यवसाय से जुड़ी नई बातें सीखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कई बार यह समझने में समय लगता है कि शुरुआत कहाँ से करें और आगे कैसे बढ़ें। ऐसे अनुभव हमें धैर्य रखना, सीखना और अपनी योजना को बेहतर बनाना सिखाते हैं।
पलक: क्या कभी ऐसा समय आया जब परिस्थितियों के कारण आगे बढ़ना मुश्किल लगा?
सुनीता जी: व्यवसाय की यात्रा हमेशा एक जैसी नहीं रहती। कभी अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते और कभी नई समस्याएँ सामने आ जाती हैं। ऐसे समय में अपने उद्देश्य को याद रखना और समाधान खोजने की कोशिश करना जरूरी है। मेरा मानना है कि कठिनाइयों से घबराने के बजाय उनसे सीखकर आगे बढ़ना चाहिए।
पलक: एक महिला उद्यमी के रूप में इस यात्रा ने आपको सबसे बड़ी सीख क्या दी?
सुनीता जी: मेरे लिए सबसे बड़ी सीख यह है कि केवल अच्छा उत्पाद बनाना ही पर्याप्त नहीं होता। हमें बाजार, ग्राहकों की पसंद, पैकेजिंग, प्रचार और व्यवसाय प्रबंधन को भी समझना पड़ता है। आत्मविश्वास के साथ लगातार सीखना किसी भी छोटे व्यवसाय को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

पारंपरिक भारतीय अचार को नई पहचान
पलक: कुटुंब जी के अंतर्गत ग्राहकों को किस प्रकार के अचार मिलते हैं?
सुनीता जी: कुटुंब जी में पारंपरिक भारतीय स्वादों को महत्व दिया जाता है। हमारी उत्पाद श्रृंखला में आम का अचार, नींबू का अचार, लाल मिर्च का अचार, हरी मिर्च का अचार और अन्य पारंपरिक किस्में शामिल हैं। हमारा प्रयास है कि ग्राहकों को ऐसे स्वाद मिलें, जिनमें भारतीय खानपान की परंपरा की झलक हो।
पलक: बाजार में पहले से कई अचार ब्रांड मौजूद हैं। कुटुंब जी अपनी अलग पहचान कैसे बनाना चाहता है?
सुनीता जी: किसी भी ब्रांड की पहचान उसके उत्पाद, गुणवत्ता, प्रस्तुति और ग्राहकों के विश्वास से बनती है। हमारा प्रयास है कि कुटुंब जी को एक ऐसी पहचान मिले, जिस पर ग्राहक भरोसा कर सकें। इसके लिए उत्पाद की गुणवत्ता, साफ-सफाई, उचित पैकेजिंग और ग्राहकों की प्रतिक्रिया पर ध्यान देना आवश्यक है।
पलक: विश्व खाद्य दिवस हमें सुरक्षित और बेहतर खाद्य व्यवस्था की याद दिलाता है। खाद्य उत्पादों के व्यवसाय में गुणवत्ता और स्वच्छता कितनी महत्वपूर्ण हैं?
सुनीता जी: खाद्य व्यवसाय में गुणवत्ता और स्वच्छता अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उत्पाद तैयार करने से लेकर पैकिंग और भंडारण तक उचित प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए। ग्राहकों का विश्वास बनाए रखने के लिए खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों और आवश्यक मानकों को गंभीरता से लेना जरूरी है।

घर से बाजार तक: छोटे खाद्य व्यवसायों की चुनौतियाँ
पलक: छोटे खाद्य व्यवसायों को अपने उत्पाद नए ग्राहकों तक पहुँचाने में किन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है?
सुनीता जी: छोटे व्यवसाय के लिए अपने उत्पाद की जानकारी लोगों तक पहुँचाना और बाजार में पहचान बनाना बड़ी चुनौती हो सकती है। इसके लिए सही पैकेजिंग, उत्पाद की अच्छी प्रस्तुति, प्रचार और ग्राहकों से संवाद जरूरी हैं। आज डिजिटल माध्यमों के जरिए भी नए ग्राहकों तक पहुँचने के अवसर उपलब्ध हैं।
पलक: क्या डिजिटल बाजार और ऑनलाइन बिक्री छोटे खाद्य व्यवसायों के लिए नए अवसर पैदा कर सकते हैं?
सुनीता जी: डिजिटल माध्यमों से उत्पादों को व्यापक बाजार में प्रस्तुत करने के अवसर मिलते हैं। हालाँकि, इसके लिए डिजिटल जानकारी, सही उत्पाद विवरण, तस्वीरें, पैकेजिंग और ऑर्डर प्रबंधन जैसी चीजों को समझना पड़ता है। मेरा मानना है कि महिलाओं को भी इन नए अवसरों के बारे में सीखना चाहिए।
पलक: मुश्किलों के बावजूद आपने अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने की प्रेरणा कैसे बनाए रखी?
सुनीता जी: जब हम किसी काम को अपने सपने से जोड़ लेते हैं, तो चुनौतियों के बीच भी समाधान खोजने की कोशिश करते हैं। मैंने सीखा है कि शुरुआत में सब कुछ जानना जरूरी नहीं, लेकिन सीखने की इच्छा होनी चाहिए। गलतियों को समझकर उनमें सुधार करना और लगातार प्रयास करते रहना बहुत महत्वपूर्ण है।

महिलाओं के हुनर को मिले नई पहचान
पलक: बहुत-सी महिलाएँ घर पर अचार, मसाले और दूसरे खाद्य उत्पाद बनाने में कुशल होती हैं, लेकिन व्यवसाय शुरू करने से डरती हैं। आप उनसे क्या कहना चाहेंगी?
सुनीता जी: मैं उनसे कहना चाहूँगी कि अपने हुनर को पहचानिए और उसे कम मत आँकिए। शुरुआत अपनी क्षमता और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार छोटे स्तर से की जा सकती है। पहले अपने उत्पाद को बेहतर बनाइए, बाजार को समझिए और धीरे-धीरे आगे बढ़िए। जरूरी यह है कि जानकारी जुटाकर सोच-समझकर शुरुआत की जाए।
पलक: जिन महिलाओं के सामने पूँजी, परिवार की जिम्मेदारियों और बाजार तक पहुँच जैसी समस्याएँ हैं, वे अपने सपनों की दिशा में पहला कदम कैसे उठा सकती हैं?
सुनीता जी: सबसे पहले अपने विचार को स्पष्ट करना चाहिए और एक छोटी व्यवसाय योजना बनानी चाहिए। उपलब्ध संसाधनों से शुरुआत करने के विकल्प तलाशने चाहिए और जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण या मार्गदर्शन लेना चाहिए। परिवार और व्यवसाय के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता, लेकिन योजना, धैर्य और सही जानकारी से आगे बढ़ने के रास्ते खोजे जा सकते हैं।
पलक: भविष्य में आप कुटुंब जी को कहाँ तक ले जाने का सपना देखती हैं?
सुनीता जी: मेरा सपना है कि कुटुंब जी की पहचान अधिक से अधिक ग्राहकों तक पहुँचे और पारंपरिक भारतीय अचार को नए बाजार मिलें। मैं चाहती हूँ कि व्यवसाय को गुणवत्ता, ग्राहकों के विश्वास और निरंतर सुधार के आधार पर आगे बढ़ाया जाए। मेरी यह यात्रा दूसरी महिलाओं को भी अपने हुनर को व्यवसाय में बदलने के लिए प्रेरित करे, यही मेरे लिए महत्वपूर्ण है।

पलक: विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर देश की महिलाओं और छोटे खाद्य उद्यमियों को आप क्या संदेश देना चाहेंगी?
सुनीता जी: मैं सभी महिलाओं से कहना चाहूँगी कि अपने हुनर पर विश्वास रखिए। नई चीजें सीखिए, अपने अवसरों को पहचानिए और सोच-समझकर पहला कदम उठाइए। रास्ते में मुश्किलें आ सकती हैं, लेकिन उनसे सीखना और आगे बढ़ने की कोशिश करना जरूरी है। अपने सपनों पर विश्वास रखिए और अपनी पहचान बनाने के लिए लगातार प्रयास करते रहिए।

मोबाइल पत्रिका का विशेष संदेश
विश्व खाद्य दिवस हमें याद दिलाता है कि भोजन केवल हमारी दैनिक आवश्यकता नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा, आजीविका और समाज से भी जुड़ा है। पारंपरिक खाद्य ज्ञान को सुरक्षित रखना और उसे समय के अनुसार बेहतर तरीकों से लोगों तक पहुँचाना महत्वपूर्ण है।
सुनीता जी और कुटुंब जी की कहानी इसी व्यापक विषय से जुड़ती है, एक पारंपरिक खाद्य उत्पाद को व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ाने का प्रयास और उस प्रक्रिया में सीखने, गुणवत्ता तथा बाजार की समझ का महत्व।
यह कहानी उन महिलाओं के लिए एक सकारात्मक संदेश है, जो अपने हुनर को पहचान दिलाना चाहती हैं। शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन सही जानकारी, निरंतर सीखने और सोच-समझकर किए गए प्रयासों से आगे बढ़ने के अवसर तलाशे जा सकते हैं।
इस विश्व खाद्य दिवस पर संदेश स्पष्ट है: पारंपरिक स्वादों को सहेजें, खाद्य गुणवत्ता को महत्व दें और महिलाओं के हुनर को आगे बढ़ने के अवसर दें।
मोबाइल पत्रिका, हुनर, उद्यमिता और सकारात्मक बदलाव की कहानियों के साथ।


Previous Post Next Post