लखनऊ, (भारत) नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के पंचम दिवस भारत सरकार के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कथा स्थल पहुंचकर व्यासपीठ का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा कथा श्रवण किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सीतापुर रोड स्थित बृज की रसोई परिसर में आयोजित श्रीराम कथा में पद्मविभूषण तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने श्रीराम-जानकी विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए भक्ति, संत परंपरा और आध्यात्मिक जीवन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संत समाज को सही दिशा प्रदान करने, जीवन में शांति स्थापित करने तथा लोगों को ईश्वर से जोड़ने का कार्य करते हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों में भाजपा महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी, विधान परिषद सदस्य इंजी. अवनीश कुमार सिंह, मुकेश शर्मा, पूर्व विधायक धीरेन्द्र प्रताप सिंह, सेवानिवृत्त आईएएस दिवाकर त्रिपाठी सहित अनेक प्रमुख व्यक्तित्व शामिल रहे। आयोजक मंडल की ओर से विधायक डॉ. नीरज बोरा ने रक्षा मंत्री का स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया।
अपने संबोधन में जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों तथा राष्ट्र निर्माण में धार्मिक ग्रंथों की भूमिका पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान किए जाने तथा रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किए जाने की मांग भी रखी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि वे पिछले तीन दशकों से अधिक समय से जगद्गुरु रामभद्राचार्य के संपर्क में हैं। उन्होंने उनकी विलक्षण स्मरण शक्ति, विद्वता और आध्यात्मिक साधना की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी प्रतिभा अत्यंत दुर्लभ है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय के लिए विशेष अधिनियम पारित कराया था, जिसके अंतर्गत उन्हें आजीवन कुलाधिपति बनाया गया।
राजनाथ सिंह ने आध्यात्मिकता को मन की विशालता से जोड़ते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रसिद्ध पंक्तियों—“छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता और टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता”—का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य का व्यक्तित्व इन मूल्यों का उत्कृष्ट उदाहरण है। श्रीराम कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया तथा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण का लाभ प्राप्त किया।